तिर्यक रेखा

रोग (कथा) — अजित आजाद
Story-कथा

रोग (कथा) — अजित आजाद

— ‘चान पर घर बनतै। घर मे लोक रहतै। लोक मुदा कतय सँ आओत? कोना केँ आओत?’ मिसरजी चिन्ता मे।...
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फगुआ: मिथिला-मैथिलक गर्व-पर्व — डॉ. कमल मोहन चुन्नू
Criticism-आलोचना

फगुआ: मिथिला-मैथिलक गर्व-पर्व — डॉ. कमल मोहन चुन्नू

समस्त मानव समुदाय हेतु पाबनि-तिहारक एकटा विशेष महत्व अछि। एकटा खास तरहक जीवन शैलीमे दीर्घकाल धरि रचैत-बसैत लोकक मनः स्थितिमे...
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प्रेमक रेखागणित (कथा) — श्याम दरिहरे
Story-कथा

प्रेमक रेखागणित (कथा) — श्याम दरिहरे

‘‘तों हमर आब केन्द्रविन्दु बनि गेल छें।’’ ‘‘आऽ तों हमर की बनि गेल छें ?’’ ‘‘हम छी बनि गेल तोहर...
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मैथिल फाल्केक प्रसूति-व्यथा: मॉलीवुडक आह्वान — डॉ. कमल मोहन चुन्नू
Criticism-आलोचना

मैथिल फाल्केक प्रसूति-व्यथा: मॉलीवुडक आह्वान — डॉ. कमल मोहन चुन्नू

मैथिली मे त’ आब कएक टा सिनेमा बनि गेल अछि। घुसकुनियाँ कटैत ई क्रम चलितो रहत से कहल जा सकैत...
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बनैत-बिगड़ैत देश आ सुकान्त सोमक कविता — डॉ. तारानंद वियोगी
Criticism-आलोचना

बनैत-बिगड़ैत देश आ सुकान्त सोमक कविता — डॉ. तारानंद वियोगी

एक सुकान्त सोम मैथिलीक एक विरल कवि छथि, आ हुनका कविता पर बात करब मैथिली काव्येतिहासक एक दुर्लभ अध्याय पर...
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समकालीन मैथिली कथा मे उपेक्षित वर्ग — डा.राजाराम प्रसाद
Criticism-आलोचना

समकालीन मैथिली कथा मे उपेक्षित वर्ग — डा.राजाराम प्रसाद

‘समकालीन कथा’, ‘कहानी’ आ ‘समांतर कथा’ एक मानल गेल अछि। समकालीन कथा मे कोनो नव आ स्पष्ट विभाजनक रेखा नहि...
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गुंजनश्रीक तीन टा मैथिली कविता
Poetry-कविता

गुंजनश्रीक तीन टा मैथिली कविता

रहना नहीं देश वीराना है मीत !कोना रहब पार लगैत अछिओहि नगर मे जाहि ठामकसुरुज गछारल होमोन झमारल होकिरण जे...
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हरेकृष्ण झाक अइपन (संस्मरण) — गुंजन श्री
Memoirs-संस्मरण

हरेकृष्ण झाक अइपन (संस्मरण) — गुंजन श्री

एक तहिया ग्रेजुएशनक फाइनल इयर मे रही। प्रोजेक्ट वर्क चलैत रहय। साधारणतया लेट सँ घुरैत रही डेरा। आइ मुदा साँझहि...
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ऑब्जेक्शन मी लार्ड नाटकक रचना सँ मंचन धरि — डॉ. कमल मोहन चुन्नू
Article-आलेख

ऑब्जेक्शन मी लार्ड नाटकक रचना सँ मंचन धरि — डॉ. कमल मोहन चुन्नू

ई आलेख 'ऑब्जेक्शन मी लार्ड' (नाटक) पोथिक भूमिका थिक। चेतना समिति, पटनाक विद्यापति स्मृतिपर्व समारोह-2015क अवसर पर एहि नाटक ‘ऑब्जेक्शन...
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कुलानन्द मिश्रक तीनटा कविता
Poetry-कविता

कुलानन्द मिश्रक तीनटा कविता

कुलानन्द मिश्रक कविताक बाट चलब जीवनक सोझ साक्षात्कार थिक। हिनक कविता मे जीवन अपन सम्पूर्ण जटिलता आ ओझरा, सरलता-सरसता-ममता आ...
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अग्निपुष्पक किछु कविता
Poetry-कविता

अग्निपुष्पक किछु कविता

मैथिली कविता मे कतेको 'वाद' सब अबैत-जाइत रहल। यथा - सहजतावाद, अभियंजनावाद, अकवितावाद, नवकवितावाद, आ अग्निकवितावाद, आदि-आदि। समयक कोनो कालखण्ड...
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कृष्णमोहन झाक किछु कविता
Poetry-कविता

कृष्णमोहन झाक किछु कविता

अहाँ केँ केओ सोर करैयै रोज राति मे अहाँ केँ केओ सोर करैयै सिनेमाक अंतिम शो खत्म भेलाक बादजखन लोकबेद...
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देवशंकर नवीनक किछु कविता
Poetry-कविता

देवशंकर नवीनक किछु कविता

बिज्जू स्त्रीवाद इजलास पर जज बैसल छथिकठघरा मे एक दिश रामआ एक दिश जानकी ठाढ़ि छथिऋषिक कुटी मे सम्मन पहुँचल...
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भाषा आ भाषा-विचार — डा. कमल मोहन चुन्नू
Article-आलेख

भाषा आ भाषा-विचार — डा. कमल मोहन चुन्नू

भारतवर्ष अदौ सँ ज्ञानक भंडार रहल अछि। एतय ज्ञानक एतेक मान रहल अछि जे एतहुक पहिल पुस्तकक नाम वेद, अर्थात्...
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डॉ. धीरेन्द्रक उपन्यास भुरुकबा मने अन्हारो मे ताकी सदा बाट भोरक — गुंजन श्री
Criticism-आलोचना

डॉ. धीरेन्द्रक उपन्यास भुरुकबा मने अन्हारो मे ताकी सदा बाट भोरक — गुंजन श्री

मैथिली साहित्य मे उपन्यासक संख्या बड्ड थोड़ रहल अछि । डॉ. अमरेश पाठक, कथाकार अशोक, डॉ. रामानंद झा रमण आ...
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वर्तमान सभ्यता और रचनात्मकता : गुंजन श्री
Article-आलेख

वर्तमान सभ्यता और रचनात्मकता : गुंजन श्री

नमस्ते!सभागार में उपस्थित सभी बन्धु/बान्धवी आपको यथोचित अभिवादन। बन्धु,आप जानते हैं कि आज दुनिया में कई सभ्यताएं चल रही हैं।...
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हम कोसिकन्हाक एकटा कवि — अजित आजाद
Poetry-कविता

हम कोसिकन्हाक एकटा कवि — अजित आजाद

हम कोसिकन्हाक एकटा कवि जाहि कालखण्डमेभरनापर विचारआ बन्हकी लागल कलम अछिओही कालखण्डमेदेशद्रोहीक तगमा लेनेहम लिखि रहल छी इन्कलाब जीह कटाक'...
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ग्लोबल गाम सँ अबैत हकार (कृष्णमोहन झा ‘मोहन’) — गुंजन श्री
Article-आलेख

ग्लोबल गाम सँ अबैत हकार (कृष्णमोहन झा ‘मोहन’) — गुंजन श्री

बर्ष 2017क जुलाई-अगस्तक गप थिक । मैसेंजर पर कृष्णमोहन जीक मैसेज आयल । लिखल छल- "अहाँक पोथी हमरा घरमे अहाँक...
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यह प्यासों का प्रेम नगर है… — गुंजन श्री
Article-आलेख

यह प्यासों का प्रेम नगर है… — गुंजन श्री

गजल मे एकटा रिवाज़ छलैक जाहि मे जँ कोनो लेखक केँ कोनो आन लेखकक मतला पसिन्न आबि जाइत छलनि त'...
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आधुनिक मैथिली कविताक वैचारिक अन्तर्यात्रा – डॉ. नारायण जी
Criticism-आलोचना

आधुनिक मैथिली कविताक वैचारिक अन्तर्यात्रा – डॉ. नारायण जी

आधुनिक मैथिली कविताक आरम्भ मुख्य रूपसँ परम्परा आ रूढ़ि पर प्रहार करैत भेल अछि। तैं एहि कविताक विरोध अथवा विद्रोह...
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