तिर्यक रेखा

Interview-साक्षात्कार

43 वर्ष पहिने डा.गंगेश गुंजनक संग डॉ. रामानन्द झा रमणक गपशप : सन्दर्भ मैथिली नऽव गीतक

प्रश्न: सहस्राधिक्य वर्षसँ प्रवाहित मैथिली गीत साहित्यक धाराकेँ आचार्य रमानाथ झा 'प्राचीनगीत' तथा 'नवीनगीत' मे वर्गीकृत कएलनि, किन्तु ओ प्रवाह...
Read More
Travelogue-यात्रा संस्मरण

मर्सी (यूरोप यात्रा-संस्मरण) — गुंजन श्री

अहल भोरे विमान ज्युरिच एअरपोर्ट पर उतरि रहल छल। राति सुतले मे जानि ने कतेको टाइम-जोन बदलि गेल छल! जेट-लैग...
Read More
Article-आलेख

मैथिली गीतक मादे — गुंजन श्री

सब भाषाक अप्पन फराक गुण-धर्म होइत छैक। हेबाको चाही। मैथिली के सेहो छैक। मने जे मैथिली मे ततेक ने लालित्य...
Read More
Article-आलेख

चौपाड़िक यात्रा-कथा

पछिला लगभग पाँच बरखक सक्रीय सामाजिक आ साहित्यिक जीवन मे सब सँ बेसी जे सहयोग केलक ओ अछि फेसबुक। फेसबुके...
Read More
Article-आलेख

नाटक चलिये रहल छैक… — गुंजन श्री

जँ समुच्चा ग्लोब केँ एकटा रंगमंच मानी त' देखा पड़ैछ जे सबठाम नाटके चलि रहल अछि। सब व्यस्त अछि नाटके...
Read More
Article-आलेख

त’ से कहलहुँ जे…

प्रत्येक व्यक्तिक स्वतंत्रता ओकर व्यक्तिगत अधिकार होइत अछि। ओकरा ओ सबटा स्वतंत्रताक अधिकार भेटओक जे ओकर छैक ताहि केँ हम...
Read More
Article-आलेख

रास, रासक आ लीला समानार्थी नहि — डॉ. कमल मोहन चुन्नू

चैतन्यदेव बंगालक एकटा समर्थ सांस्कृतिक नायक रूप मे प्रसिद्ध भेल छथि। हिनकर जीवनी पढ़ला सँ आ हिनकहि परम्पराक परवर्ती आचार्यलोकनिक...
Read More
Article-आलेख

मिशन भाइसाहेब : दू पड़ाव (संस्मरण) — डॉ. कमल मोहन चुन्नू

पहिल पड़ाव : छाड़इत निकट नयन बह नीरे साहित्यमे हमर प्रवेश भेल नाटक बाटे। प्रारम्भ हम नाटकेसँ कयल। पटनाक मैथिली...
Read More
Criticism-आलोचना

सिमान केँ दुरुस्त करैत कविता — डॉ. कमल मोहन चुन्नू

ठोस प्रश्न ई नहि जे कविता गामक अछि आ कि शहरक अर्थात् कविताक केन्द्रीय कक्ष मे गाम अछि किंवा शहर।...
Read More
Criticism-आलोचना

उपेन्द्र ठाकुर ‘मोहन’क काव्यपक्ष (संदर्भ: बाजि उठल मुरली) — डॉ. कमल मोहन चुन्नू

कोनहु विशेष संदर्भ मे कोनहु कवि किंवा हुनक कविताक प्रसंग विचार करबाकाल कविक रचना, विचार आ हुनक वैचारिक वक्तव्य तीनू...
Read More
Story-कथा

रोग (कथा) — अजित आजाद

— ‘चान पर घर बनतै। घर मे लोक रहतै। लोक मुदा कतय सँ आओत? कोना केँ आओत?’ मिसरजी चिन्ता मे।...
Read More
Criticism-आलोचना

फगुआ: मिथिला-मैथिलक गर्व-पर्व — डॉ. कमल मोहन चुन्नू

समस्त मानव समुदाय हेतु पाबनि-तिहारक एकटा विशेष महत्व अछि। एकटा खास तरहक जीवन शैलीमे दीर्घकाल धरि रचैत-बसैत लोकक मनः स्थितिमे...
Read More
Story-कथा

प्रेमक रेखागणित (कथा) — श्याम दरिहरे

‘‘तों हमर आब केन्द्रविन्दु बनि गेल छें।’’ ‘‘आऽ तों हमर की बनि गेल छें ?’’ ‘‘हम छी बनि गेल तोहर...
Read More
Criticism-आलोचना

मैथिल फाल्केक प्रसूति-व्यथा: मॉलीवुडक आह्वान — डॉ. कमल मोहन चुन्नू

मैथिली मे त’ आब कएक टा सिनेमा बनि गेल अछि। घुसकुनियाँ कटैत ई क्रम चलितो रहत से कहल जा सकैत...
Read More
Criticism-आलोचना

बनैत-बिगड़ैत देश आ सुकान्त सोमक कविता — डॉ. तारानंद वियोगी

एक सुकान्त सोम मैथिलीक एक विरल कवि छथि, आ हुनका कविता पर बात करब मैथिली काव्येतिहासक एक दुर्लभ अध्याय पर...
Read More
Criticism-आलोचना

समकालीन मैथिली कथा मे उपेक्षित वर्ग — डा.राजाराम प्रसाद

‘समकालीन कथा’, ‘कहानी’ आ ‘समांतर कथा’ एक मानल गेल अछि। समकालीन कथा मे कोनो नव आ स्पष्ट विभाजनक रेखा नहि...
Read More
Poetry-कविता

गुंजनश्रीक तीन टा मैथिली कविता

रहना नहीं देश वीराना है मीत !कोना रहब पार लगैत अछिओहि नगर मे जाहि ठामकसुरुज गछारल होमोन झमारल होकिरण जे...
Read More
Memoirs-संस्मरण

हरेकृष्ण झाक अइपन (संस्मरण) — गुंजन श्री

एक तहिया ग्रेजुएशनक फाइनल इयर मे रही। प्रोजेक्ट वर्क चलैत रहय। साधारणतया लेट सँ घुरैत रही डेरा। आइ मुदा साँझहि...
Read More
Article-आलेख

ऑब्जेक्शन मी लार्ड नाटकक रचना सँ मंचन धरि — डॉ. कमल मोहन चुन्नू

ई आलेख 'ऑब्जेक्शन मी लार्ड' (नाटक) पोथिक भूमिका थिक। चेतना समिति, पटनाक विद्यापति स्मृतिपर्व समारोह-2015क अवसर पर एहि नाटक ‘ऑब्जेक्शन...
Read More
Poetry-कविता

कुलानन्द मिश्रक तीनटा कविता

कुलानन्द मिश्रक कविताक बाट चलब जीवनक सोझ साक्षात्कार थिक। हिनक कविता मे जीवन अपन सम्पूर्ण जटिलता आ ओझरा, सरलता-सरसता-ममता आ...
Read More
1 2 3 4